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राष्ट्र की अस्मिता की प्रस्थापना के लिए भव्य राममंदिर आवश्यक – डा. मोहन भागवत
नागपुर दिनांक 16 अगस्त
संतो द्वारा स्थापित श्री हनुमत शक्ति जागरण समिति ने अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर निर्माण हेतु श्री हनुमत शक्ति जागरण अभियान प्रारंभ किया है।
 
अभियान के विदर्भ प्रान्त के उद्घाटन समारोह में आज सरसंघचालक श्री मोहन राव भागवत उपस्थित रहे। इस अवसर पर नागपुर के कई गणमान्य नागरिकों के उपस्थिति में बोलते हुए उन्होंने कहा-
भगवान राम का भव्य मंदिर उनके जन्मभूमि पर बनाना है। ऐतिहासिक काल से उसके लिए संघर्ष चले। स्वतंत्रता के बाद भी वह संघर्ष जारी है। उसमें एक ऐसा मोड़ आया है कि न्यायालय का निर्णय सितंबर में आने की संभावना है।
आज जहाँ अयोध्या है वही भगवान राम की अयोध्या थी, वहीं पर भगवान राम का जन्म हुआ था,इसके बहुत सारे प्रमाण उपलब्ध हैं। वो दिये भी गये हैं। न्यायालय में वकीलों के युक्तिवाद भी संपन्न हो गए हैं। अभी न्याय की अपेक्षा है। वैसे यह विषय मनुष्य निर्मित न्यायालयों के अधीन नहीं है। विधिविधान की ही यह सम्मति है कि इस देश की श्रद्धा का यह विषय होने के कारण उस श्रद्धा को मान लेना चाहिए। परंतु हम देख रहे हैं कि उसके लिए भी हमको संघर्ष करना पड़ रहा है। आंदोलन करने पड़ रहे हैं। सत्य की प्रतिष्ठापना के लिए ‘सत्यमेव जयते’ वाले अपने देश में लंबे संघर्ष में से हम लोगों को जाना पड़ा। उसी प्रकार, संघर्ष में से जाना पड़े तो संघर्ष करके,सहमती से होगा तो सहमती से, वहाँ पर भव्य राम मंदिर होना निश्चित है।
भगवान राम, इनका केवल पूजा पद्धति के चिंतन में से आया हुआ महत्त्व नहीं है। वो तो है ही, यह रामभक्तों का देश है, राम की पूजा करनेवालों का देश है। परंतु इस देश के राष्ट्रीय महापुरुष भगवान राम हैं। अपने देश के स्वतंत्रता के बाद निर्मित संविधान में, उसके मूल प्रति में राष्ट्रीय महापुरुषों के चित्र दिये हैं। पहले तो अपने देश की प्राचिनता दर्शानेवाले ऋषि मुनियों के आश्रम का चित्र हैं,उसके बाद, उस समय की सभ्यता का आज जो प्रमाण मिले अवशेषों के आधार पर उस समय की कल्पना करके चित्र हैं। और जब सर्वश्रुत और सब ग्रंथों में वर्णित इतिहास का प्रारंभ होता है, तब पहला चित्र लंका विजय करके पुष्पक विमान में वानरगण सहित सीता को लेकर लौटनेवाले राम लक्ष्मण का चित्र है। राम इस देश की मर्यादा है। आचरण का आदर्श है।
 जिस आचरण के कारण अनेक समस्याओं से पीड़ित आज की दुनिया को नयी राह मिलने वाली है उस आचरण के मानक प्रभुरामचन्द्र हैं। रामो विग्रहः धर्मः ऐसा कहते हैं। ये कौन सा धर्म है? ये केवल पूजा विधानवाला धर्म नहीं है, ये समाज को धारण करने वाला धर्म है, जिससे समस्त मनुष्य जाति विश्व के जन, जमीन, जंगल, जानवर के साथ सुखपूर्वक अपने जीवन का विकास करते हुए,जीवन के अंतिम सत्य को प्राप्त करने में सफल होगी। ऐसा एक जीवन बनानेवाला, सार्वत्रिक,त्रिकालाबाधित, सभी दुनिया के लिए एकमात्र, जिसको मानवता कहा जाता है, बंधुभाव कहा जाता है,वही यह धर्म है। उस धर्माचरण की मर्यादा को प्रभु रामचन्द्र ने अपने जीवन से प्रस्थापित किया। उस मर्यादा को छोड़ना मनुष्य के लिए कल्याणकारक नहीं है। वह मर्यादा छूट गयी तो अपने देश में कैसे-कैसे, क्या-क्या हो रहा है यह हम सब जानते हैं। बड़ा विचित्र समय है। राममंदिर की प्रस्थापना, भव्य राममंदिर का निर्माण यह केवल पूजा पद्धति की बात नहीं है, वह राष्ट्रीय आवश्यकता है, आज के दुनिया की वैश्विक आवश्यकता है। इसलिए भले ही यह काम करते समय कुछ संघर्ष करना पड़ा हो, लेकिन इस कार्य की सफलता सारे विश्व के लिए कल्याणकारक,मंगलकारक, शांतिकारक है।
हम अपने राष्ट्र की अस्मिता की प्रस्थापना की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम संपूर्ण विश्व में सुख-शांति लानेवाला जीवन खड़ा करने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी को धर्मकार्य कहते हैं। उस धर्मकार्य का संकल्प हम पहले ही ले चुके हैं। अभी समय ऐसा है कि उसका फिर से स्मरण करना है। और स्मरण करते ही ध्यान में आता है कि रामकाज को सवारने वाले कौन हैं? श्री हनुमान है। भगवान राम के मानस को विश्व में प्रत्यक्ष साकार करने का व्रत लिए हुए रामभक्त श्री हनुमान। वे जब जागृत होंगे, हम सबके मन, वचन, कर्म में, तब, अब समय ऐसा है कि भव्य राममंदिर बन सकता है।
इसलिए देश की संत शक्ति ने हनुमान शक्ति जागरण के अभियान का आवाहन किया है। इसमें हमे अपने लिए नहीं, किसी पार्टी के लिए नही, किसी संस्था संगठन के लिए नही, तो रामकाज का दूत बनके सहभागी होना है यह उसका अर्थ समझकर, भव्य श्री राममंदिर की पूर्ती हम अपने आँखों से देख सके, ऐसा संकल्प कर हम सब इस अभियान में सहभागी हो

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